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ठोसों में निविड संकुलन (एक-विमीय द्वि-विमीय) Close Packing in Solids

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ठोसों में निविड संकुलन (Close Packed Structure in Solids) ठोस के क्रिस्टल निर्माण में अवयवी कण (परमाणु, अणु या आयन) एक-दूसरे के बहुत अधिक निकट आ जाते हैं कणों के बीच बहुत कम खाली जगह होती है अतः वह व्यवस्था जिसमें क्रिस्टल का अधिकतम भाग अवयवी कणों द्वारा घेरा हुआ होता है और बहुत कम भाग ही खाली(रिक्त) बचता है, निविड संकुलित व्यवस्था कहलाती है। दोस्तों ऐसी स्थिति में अवयवी कण परस्पर चारों ओर से एक-दूसरे को स्पर्श करते हैं। इस व्यवस्था से ही ठोस अधिकतम स्थायित्व प्राप्त करते हैं। अवयवी कण अलग-अलग आकार के होते हैं। इस कारण निविड संकुलन की व्यवस्थाएँ भी अलग-अलग होती हैं। इन व्यवस्थाओं को समझने के लिए अवयवी कणों को समरूप(एक समान) कठोर गोले माना जाता है। किसी ठोस में अवयवी कणों के निश्चित क्रम के कारण क्रिस्टल का बाहरी आकार बनता है जिसे क्रिस्टल जालक कहते हैं। जब अवयवी कणों की पुनरावृत्ति (Repeat होना) एक सरल रेखा में होती है तो इसे एकविमीय जालक कहते हैं। अवयवी कणों की पुनरावृत्ति किसी तल में होने पर इसे द्विविमीय जालक और अवयवी कणों की पुनरावृत्ति त्रिविम(3D) में होने पर इसे त्रिविम...