त्रिविमीय निविड संकुलन Three Dimensional Close Packing
त्रिविमीय निबिड़ संकुलन (Three-dimensional
Close Packing)-वास्तविक संरचना हमेशा त्रिविमीय होती है। द्विविमीय परतों को एक-दूसरे पर रखकर त्रिविमीय संरचना बनाते है। यह संकुलन दो प्रकार का होता है-
(i) वर्गाकार निबिड़ संकुलन से त्रिविमीय संकुलन
(ii) षट्कोणीय निबिड़ संकुलन से त्रिविमीय संकुलन
1. द्विविमीय वर्गाकार निबिड़ संकुलन से त्रिविमीय संकुलन बनाना (सरल घनीय जालक)-
जब द्वितीय वर्गाकार संकुलित परत को प्रथम परत के ऊपर इस प्रकार रखते हैं कि द्वितीय परत के गोले प्रथम परत के गोलों के ठीक ऊपर हो तो यह संकुलन बनता है। इसमें सभी परतों के गोले क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर रूप से एक सीध में होते हैं। इसमें सभी परतें समान प्रकार की होती हैं अत: इस व्यवस्था को AAA प्रकार की व्यवस्था बोलते हैं। इस प्रकार बने क्रिस्टल जालक को सरल घनीय जालक कहते हैं। इसमें सरल एकक कोष्ठिका होती है।
2. द्विविमीय-षट्कोणीय निबिड़ संकुलन से त्रिविमीय संकुलन बनाना-
इसमें षटकोणीय परतों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर त्रिविमीय निबिड़ संकुलित संरचना बनाते हैं।
सबसे पहले प्रथम परत के ऊपर द्वितीय परत को रखते हैं उसके बाद द्वितीय परत के ऊपर तृतीय परत को रखते हैं-
इसमें षटकोणीय परतों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर त्रिविमीय निबिड़ संकुलित संरचना बनाते हैं।
सबसे पहले प्रथम परत के ऊपर द्वितीय परत को रखते हैं उसके बाद द्वितीय परत के ऊपर तृतीय परत को रखते हैं-
(अ) प्रथम परत के ऊपर द्वितीय परत रखना-
एक द्विविमीय षट्कोणीय परत लेते हैं और एक वैसी ही परत इसके ऊपर इस प्रकार रखते हैं कि द्वितीय परत के गोले प्रथम परत के अवनमनों या गड्ढों में आ जाते हैं। ऐसा करने पर प्रथम परत के सभी अवनमन या त्रिकोणीय रिक्तियाँ द्वितीय परत के गोलों से नहीं ढक पाती हैं। इससे अलग-अलग व्यवस्थाओं की उत्पन्न होती हैं।
जब द्वितीय परत का एक गोला प्रथम परत की त्रिकोणीय रिक्ति के ऊपर होता है तो एक चतुष्फलकीय रिक्ति बनती है और जब द्वितीय परत की त्रिकोणीय रिक्ति प्रथम परत की त्रिकोणीय रिक्ति के ऊपर होती है तो अष्टफलकीय रिक्ति बनती है।
नीचे दिए गए चित्र में चतुष्फलकीय रिक्ति को T से और अष्टफलकीय रिक्ति को O से प्रदर्शित किया गया है-
एक द्विविमीय षट्कोणीय परत लेते हैं और एक वैसी ही परत इसके ऊपर इस प्रकार रखते हैं कि द्वितीय परत के गोले प्रथम परत के अवनमनों या गड्ढों में आ जाते हैं। ऐसा करने पर प्रथम परत के सभी अवनमन या त्रिकोणीय रिक्तियाँ द्वितीय परत के गोलों से नहीं ढक पाती हैं। इससे अलग-अलग व्यवस्थाओं की उत्पन्न होती हैं।
जब द्वितीय परत का एक गोला प्रथम परत की त्रिकोणीय रिक्ति के ऊपर होता है तो एक चतुष्फलकीय रिक्ति बनती है और जब द्वितीय परत की त्रिकोणीय रिक्ति प्रथम परत की त्रिकोणीय रिक्ति के ऊपर होती है तो अष्टफलकीय रिक्ति बनती है।
![]() |
| अष्टफलकीय रिक्ति Octahedral voids |
![]() |
| चतुष्फलकीय रिक्तिका Tetrahedral void |
(ब) द्वितीय परत के ऊपर तृतीय परत रखना-
यह दो प्रकार से होता हैं-
यह दो प्रकार से होता हैं-
(i) चतुष्फलकीय रिक्तियों को ढकना-
द्वितीय परत की चतुष्फलकीय रिक्तियों को तृतीय के गोलों से ढकते हैं। इस स्थिति में तीसरी परत के गोले प्रथम परत के गोलों की एकदम सीधी रेखा में होते हैं तथा यह पैटर्न दोहराया जाता है। अतः इसे ABAB.... प्रकार का पैटर्न कहते हैं तथा इस संरचना को षट्कोणीय निबिड़ संकुलित संरचना कहते हैं। इसे संक्षिप्त में hcp (hexagonal close packed structure) कहते हैं।
उदाहरण-मैग्नीशियम (Mg) तथा जिंक (Zn) धातुओं में hcp संरचना होती है।
द्वितीय परत की चतुष्फलकीय रिक्तियों को तृतीय के गोलों से ढकते हैं। इस स्थिति में तीसरी परत के गोले प्रथम परत के गोलों की एकदम सीधी रेखा में होते हैं तथा यह पैटर्न दोहराया जाता है। अतः इसे ABAB.... प्रकार का पैटर्न कहते हैं तथा इस संरचना को षट्कोणीय निबिड़ संकुलित संरचना कहते हैं। इसे संक्षिप्त में hcp (hexagonal close packed structure) कहते हैं।
उदाहरण-मैग्नीशियम (Mg) तथा जिंक (Zn) धातुओं में hcp संरचना होती है।
(ii) अष्टफलकीय रिक्तियों का आच्छादन या ढकना-
तृतीय परत को द्वितीय परत के ऊपर इस प्रकार रखते हैं कि उसके गोले अष्टफलकीय रिक्तियों को ढके। इस व्यवस्था में तीसरी परत के गोले प्रथम व द्वितीय किसी भी परत के साथ एक सीधी रेखा में नहीं होते हैं। इस व्यवस्था को ABCABC. ... व्यवस्था कहते हैं। इस प्रकार प्राप्त संरचना को फलक केन्द्रित घनीय [fcc या face centered cubic] अथवा घनीय निविड संकुलित [ccp या cubic close packing ] संरचना कहते है।
उदाहरण- इस प्रकार की संरचना धातुओं, जैसे ताँबा Cu तथा चाँदी Ag में पायी जाती है।
hcp और ccp दोनों में प्रत्येक गोला बारह गोलों के संपर्क में रहता है, अत: इन दोनों संरचनाओं में उपसहसंयोजन संख्या 12 होती है।
तृतीय परत को द्वितीय परत के ऊपर इस प्रकार रखते हैं कि उसके गोले अष्टफलकीय रिक्तियों को ढके। इस व्यवस्था में तीसरी परत के गोले प्रथम व द्वितीय किसी भी परत के साथ एक सीधी रेखा में नहीं होते हैं। इस व्यवस्था को ABCABC. ... व्यवस्था कहते हैं। इस प्रकार प्राप्त संरचना को फलक केन्द्रित घनीय [fcc या face centered cubic] अथवा घनीय निविड संकुलित [ccp या cubic close packing ] संरचना कहते है।
उदाहरण- इस प्रकार की संरचना धातुओं, जैसे ताँबा Cu तथा चाँदी Ag में पायी जाती है।
hcp और ccp दोनों में प्रत्येक गोला बारह गोलों के संपर्क में रहता है, अत: इन दोनों संरचनाओं में उपसहसंयोजन संख्या 12 होती है।







टिप्पणियाँ