क्रिस्टल जालक और एकक कोष्ठिका क्या है समझें सरल हिन्दी में





अध्याय-1 ठोस अवस्था part-2 

क्रिस्टल जालक या ब्रेवे जालक/Crystal lattice
"त्रिविम आकाश(3D) में किसी क्रिस्टल की इकाइयों की एक नियमित व्यवस्था(Regular Arrangements) होती जिसे क्रिस्टल जालक कहते है।"
इसमें अवयवी कणों का नियमित (Regular) और पुनरावृत्त (Repeating) पैटर्न होता है। "अतः किसी क्रिस्टल में अवयवी कणों (बिन्दुओं) की नियमित त्रिविमीय व्यवस्था को क्रिस्टल जालक कहते है

 क्रिस्टल परमाणु, अणु या आयन से मिलकर बनता है ये क्रिस्टल के अवयवी कण हैं जब इन अवयवी कणों को आपस में रेखा द्वारा जोड़ा जाता हैं तो क्रिस्टल का आरेख बनता है। 

क्रिस्टल जालक
Crystal lattice


एकक कोष्ठिका(Unit cell)
"किसी क्रिस्टल जालक का वह सबसे छोटा भाग जिसकी त्रिविम में पुनरावृत्ति(दोहराना) से क्रिस्टल का निर्माण होता है उसे एकक कोष्ठिका कहते हैं।
                         अथवा
 एकक कोष्ठिका क्रिस्टल जालक का वह सबसे छोटा भाग है जो विभिन्न दिशाओं में पुरावृत(Repeat) होकर विशाल क्रिस्टल जालक का निर्माण करता है।

एकक कोष्ठिका के पैरामीटर
(1) एकक कोष्ठिका के तीनों किनारों या भुजाओं को a, b और c के द्वारा दर्शाते हैं, जो कि एक-दूसरे के लंबवत् हो भी सकते हैं या नहीं भी।
(2) किनारों  के मध्य कोण अल्फा (b और c के मध्य), बीटा (a और c के मध्य) और गामा (a और b के मध्य) के द्वारा दर्शाए जाते हैं।

क्रिस्टल जालक के अभिलक्षण-
1. क्रिस्टल जालक में प्रत्येक बिंदु को जालक बिंदु या जालक स्थल कहते है।
2. क्रिस्टल जालक का प्रत्येक बिंदु एक अवयवी कण को प्रदर्शित करता है जो एक परमाण. अणु अथवा आयन हो सकता है।
3. जालक बिंदुओं को सीधी रेखाओं द्वारा जोड़ा जाता है तथा जालक बिन्दुओं की त्रिविमीय व्यवस्था से ही क्रिस्टल की ज्यामिति निर्धारित होती है।
4. जिन समतल पृष्ठों द्वारा जालक जुड़े रहते हैं उन्हें फलक(face) कहते हैं।
5. दो समीपवर्ती फलकों के प्रतिच्छेदन से क्रिस्टल का किनारा बनता है।

एकक कोष्ठिका के प्रकार (Types of Unit Cell)
(1) आद्य एकक कोष्ठिका
(2) केन्द्रित एकक कोष्ठिका

(1) आद्य या सरल एकक कोष्ठिका (Primitive or Simple unit cell)-
जब अवयवी कण एकक कोष्ठिका के केवल कोनों पर उपस्थित होते हैं, तो उसे आद्य एकक कोष्ठिका कहते हैं।
(2) केंद्रित एकक कोष्ठिका (Centred unit cell)-
जब एकक कोष्ठिका में एक अथवा अधिक अवयवी कण, कोनों के अतिरिक्त अन्य स्थानों पर भी उपस्थित होते हैं, तो उसे केंद्रित एकक कोष्ठिका कहते हैं। यह तीन प्रकार की होती हैं-

(a) काय केन्द्रित या अंत:केंद्रित एकक कोष्ठिका (Body centred unit cell)-
इसमें एक अवयवी कण कोनों में उपस्थित कणों के अतिरिक्त उसके केंद्र (Body centre) में भी उपस्थित होता है।


(b) फलक-केंद्रित एकक कोष्ठिका (Face centred unit cell)- 
इसमें कोनों पर उपस्थित अवयवी कणों के अतिरिक्त एक अवयवी कण प्रत्येक फलक के केंद्र पर भी स्थित होता है।
Crystalline solid
(c) अंत्य-केंद्रित या आधार-केन्द्रित एकक कोष्ठिका (End centred unit cell)-
इसमें कोनों पर उपस्थित अवयवी कणों के अतिरिक्त एक-एक अवयवी कण किन्हीं दो विपरीत फलकों के केन्द्र में भी पाया जाता है मतलब आमने-सामने पाया जाता है।



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